दिल और दिमाग की लड़ाई के बीच अक्सर एक औरत ही तम्बू गाडे मिलती है
किसी के फुकरेपन में किये गए एहसान उसकी संपन्नता आते ही भुला दिए जाते हैं
एक साडी लड़की को महिला बना देती है
औरत के खानदान का उसके पहनावे और मर्द के खानदान का उसकी शालीनता से पता चलता है
उधार मांग कर जीने वाले की उम्र बहुत लम्बी होती है
साडी की रचना जरूर एक रूमानी शख्स ने की होगी.
एक महिला जब आपकी और देख मुस्कुराती है उसका असली मतलब होता है "मूर्ख अभी भी समय है, संभल जा"
औरत एक वो चरित्र है जो पहले तो आपको एक ग्लास पानी देकर आपकी प्यास बुझायेगी और फिर आपको कुंवा खोदने को कहेगी
कोयल की मीठी आवाज़ के पीछे कौवे का दर्द होता है
बच्चों को अगर समझना है तो उन जैसे ही बन जाओ
20 साल 40 दोस्त,30 साल 20 दोस्त 40 साल 10 दोस्त 50 साल5 दोस्त 60 साल सिर्फ कन्धा देने को 4 दोस्त. वो चार दोस्त आज से ही कमाना शुरू कर दें
किसी के भी दिल में जगह बनाने से पहले वहां बहुत सारी साफ़ सफाई करनी पड़ती है
महिलाओं की यादाश्त भी अगर खो जाये तो भी वे होंठो पर लिपस्टिक लगाना नहीं भूलेंगी
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई आपस में हैं भाई भाई- वो तो ठीक है पर वो मुआ पूजा वाला कमरा ही तो फसाद की जड़ है !
अगर भगवान् है, तो शर्तिया बुल्लेट ही चलाता होगा, पर सब देवियों की कारों में बहुत डेंट पड़े होंगे
शराब पीने और छोडने के बीच बहुत सारे सरदर्द होते हैं
कुछ लोगो की जबान इतनी लम्बी होती है की आप उसपर कार रेस आयोजित कर सकते हैं
आपके कथन से ही आपके चरित्र की रूपरेखा तैयार होती है- इसलिए जो बोलें, सोच विचार कर बोलें
हमेशा बड़ी विपदा का स्वागत करो- क्योंकि विपदा के आते ही सच और झूठ की पहचान भी आती है
जैसे प्यार के साथ समर्पण आता है वैसे ही विपदा के साथ कुछ नए रिश्ते भी आते हैं
गलती की सजा अवश्य दो पर उतनी ज्यादा नहीं जितनी छोटी गलती हो
कभी आंख मिला कर बात न करने वाले व्यक्ति पर विस्वास न करो
रोओ भी कुछ इस तरह की खुदा को भी तुमपर हंसी आ जाये
"भैया ................थाने तक जाना है जाना है" ये बोलकर ऑटो में बैठोगे तो शर्तिया बात, वो आपको सही भाडा बताएगा.
आपके इलाके का पानवाला भैय्या और नाई आपके चरित्र का पूरा हिसाब किताब रखता है. इनसे बना कर रखना.
गौर करना. बारिश के दौरान अक्सर लडकियां भीगना पसंद करती हैं
जिन नवदम्पतियों के जल्दी औलाद नहीं होती वे पड़ोसियों और रिश्तेदारों की गप्पों के प्रिय विषय होते हैं
कभी भी इतनी अच्छे न बनो की एक दिन खुद के लिए ही बुरे बन जाओ
"खाने से पहले अपने हाथ धो लें" आजादी के ६२ साल बाद भी हमारे रास्ट्रीय चैनल अगर ये दिखाते हैं तो सोचिये अभी कितना दूर जाना है
मेरे दिमाग और दिल की दूरी के बीच कई डाक्टरी कष्ट हैं.
जरूरी नहीं की आपकी प्रेमिका का पिता आपको इसलिए घूरे क्योंकि आप उसे नापसंद हो, हो सकता है आपकी जिप खुली हुई हो या फिर आपने लाल रंग के मोजे पहने हों.!!
हर जाने वाला मेरा एक हिस्सा तोड़ कर ले गया, आज होश में अपने को देखा तो पाया मैं तो किसी और की साँसों में हु दूर से अपने आपको देखा तो निढाल पाया, फिर गौर से देखा तो पाया की मेरा साया भी कोई तोड़ ले गया
पिछले 10 सालों की बातें याद करके लगता है हम कितने बड़े ढक्कन थे
एक मर्द की सिर्फ दो ही असली इच्छाएं होती हैं, भूख और प्यास. बाकी सब नौटंकी है
हौवा के सेब खाते ही खुदा को समझ में आ गया होगा की सॉफ्टवेर प्रोग्राम में वाइरस आ गया है
किसी काम को करना और समझना एक कला है, जो इसे समझता है वो ज्ञानी है, और जो नहीं वो एक सरकारी कर्मचारी है
राम और रहीम के बीच से अगर ये नेता नामक ढक्कन हट जाये तो ईद की सिवैयां बहुत मीठी लगेंगी
औरत प्रेम तो किसी बुद्धिमान पुरुष से ही करेगी पर शादी किसी ढक्कन से
काश शादियाँ डाउनलोड की जा सकती और पसंद न आने पर डिलीट भी
एक संस्कारी व्यक्ति की सबसे पहली पहचान है की वो महिलाओं को पूरा सम्मान देगा
अगर अपने आंसू नहीं छिपा सकते तो फोरन गोलगप्पे खाना शुरू कर दीजिये
अगर दोस्तों की सही पहचान करनी है तो उनसे तब उधार मांगो जब आपके पास पैसे हों
Monday, September 21, 2009
मेरी रची जीवन की कुछ और सूक्तियां -Part 2
१० मर्दों के बीच अगर एक महिला खड़ी हो जायेगी तो खुद बा खुद उनके काम करने की क्षमता बढ़ जायेगी
हर बाप को दूसरे बच्चे में अपना बच्चा नज़र आता है और हर दूसरे की बीवी में एक नई बीवी
अगर सेक्स को एक निहायत ही मनहूसियत से भरा विषय बनाना हो तो साथ में ऐड्स को घोल दो
मैने आज एक ६०-६५ साल के बूढे को एक १६-17 साल की लड़की को घूरते पाया, पर अजीब बात ये थी की उसकी आँखों में आशा की वो किरण थी जिसे देख लगता था की उसे पूरी उम्मीद थी की वो लड़की भी उसे उस ही भावना से ठीक वैसे ही घूरेगी. इसे कहते हैं जनाब सकारात्मक सोच. जीवन में मैने किसी के अन्दर इतना अति आत्मविश्वास कभी नहीं देखा
भगवान अगर है तो वो जरूर सरदार ही होगा, क्यूंकि वो हर कोने हर जगह पाया जाता है - सत् श्री अकाल.
आजकल म्यूजिक चैनल के कई विडियो को देख कर लगता है की लड़के को मिर्गी और लड़की को करंट की नंगी तार छूने की बीमारी है
मुझे कई बार आजकल के गानों के नाच देखते वक़्त अपने स्कूल की पी टी याद आ जाती है
आजकल के टीवी कार्यक्रमों को देख कर ये लगता है की उन्होंने ठान ली है की जो गन्दा और फूहड़ है वो हम बनायेंगे, बाकी फिल्मवालों को बनाने दो
मेरी गाँव की भोली भली माताजी आजकल टीवी गुड टाईम्स देखती हैं, उनकी सफाई है "पुत्तर और क्या देखूं, बहु मेरी है नहीं सास बहु सीरियल देख कर भी किसे कोसुं ?
प्रोडक्शन के पेशे में रहने के कई दोष हैं, कभी किसी निहायत खूबसूरत लड़की को देखता हूँ तो सिर्फ एक ही ख्याल आता है, भगवान् ने किस सप्लायर से इसे बनवाया होगा?
गीतकार एक अच्छे संगीतकार के बगैर ऐसा है जैसे की धागे के बगैर मोती, एक अच्छा संगीतकार ही गीतकार की मर्यादा बचा सकता है
लेखकों के साथ समस्या ये है की वो बिजली के बिल में भी कमियाँ निकालने बैठ जाते हैं
हर बाप को दूसरे बच्चे में अपना बच्चा नज़र आता है और हर दूसरे की बीवी में एक नई बीवी
अगर सेक्स को एक निहायत ही मनहूसियत से भरा विषय बनाना हो तो साथ में ऐड्स को घोल दो
मैने आज एक ६०-६५ साल के बूढे को एक १६-17 साल की लड़की को घूरते पाया, पर अजीब बात ये थी की उसकी आँखों में आशा की वो किरण थी जिसे देख लगता था की उसे पूरी उम्मीद थी की वो लड़की भी उसे उस ही भावना से ठीक वैसे ही घूरेगी. इसे कहते हैं जनाब सकारात्मक सोच. जीवन में मैने किसी के अन्दर इतना अति आत्मविश्वास कभी नहीं देखा
भगवान अगर है तो वो जरूर सरदार ही होगा, क्यूंकि वो हर कोने हर जगह पाया जाता है - सत् श्री अकाल.
आजकल म्यूजिक चैनल के कई विडियो को देख कर लगता है की लड़के को मिर्गी और लड़की को करंट की नंगी तार छूने की बीमारी है
मुझे कई बार आजकल के गानों के नाच देखते वक़्त अपने स्कूल की पी टी याद आ जाती है
आजकल के टीवी कार्यक्रमों को देख कर ये लगता है की उन्होंने ठान ली है की जो गन्दा और फूहड़ है वो हम बनायेंगे, बाकी फिल्मवालों को बनाने दो
मेरी गाँव की भोली भली माताजी आजकल टीवी गुड टाईम्स देखती हैं, उनकी सफाई है "पुत्तर और क्या देखूं, बहु मेरी है नहीं सास बहु सीरियल देख कर भी किसे कोसुं ?
प्रोडक्शन के पेशे में रहने के कई दोष हैं, कभी किसी निहायत खूबसूरत लड़की को देखता हूँ तो सिर्फ एक ही ख्याल आता है, भगवान् ने किस सप्लायर से इसे बनवाया होगा?
गीतकार एक अच्छे संगीतकार के बगैर ऐसा है जैसे की धागे के बगैर मोती, एक अच्छा संगीतकार ही गीतकार की मर्यादा बचा सकता है
लेखकों के साथ समस्या ये है की वो बिजली के बिल में भी कमियाँ निकालने बैठ जाते हैं
Tuesday, August 18, 2009
किस्मत का कुम्हार
मैं कौन हूँ? बस एक कुम्हार
जिसने तुझे मिटटी से प्याला बना डाला
अब ये तेरी इच्छा है की तू पूजा का दीप बन
या फिर बन मय का प्याला
पर मय से मदमस्त हो लोग प्याला गिरा तोड़ डालते हैं
पूजा के दीप फिर भी कुछ दिन और महीने जी जाते हैं
पूजा के दीपो को गिरने का भय नहीं होता
वो तो गंगा में ही बहाए जाते हैं
मिटटी की नियति है, वो फिर एक दिन मिटटी में मिल जायेगी
पर तब इस कुम्हार तक तुम्हारी पुकार पहुँच ही न पायेगी
जिस मिटटी से मैं बना हूँ, वो मिटटी भी मुझे कभी बुलाएगी
उसी मिटटी से फिर एक नया कुम्हार बनेगा,
और फिर कुछ प्यालों की किस्मत लिखी जायेगी
जिसने तुझे मिटटी से प्याला बना डाला
अब ये तेरी इच्छा है की तू पूजा का दीप बन
या फिर बन मय का प्याला
पर मय से मदमस्त हो लोग प्याला गिरा तोड़ डालते हैं
पूजा के दीप फिर भी कुछ दिन और महीने जी जाते हैं
पूजा के दीपो को गिरने का भय नहीं होता
वो तो गंगा में ही बहाए जाते हैं
मिटटी की नियति है, वो फिर एक दिन मिटटी में मिल जायेगी
पर तब इस कुम्हार तक तुम्हारी पुकार पहुँच ही न पायेगी
जिस मिटटी से मैं बना हूँ, वो मिटटी भी मुझे कभी बुलाएगी
उसी मिटटी से फिर एक नया कुम्हार बनेगा,
और फिर कुछ प्यालों की किस्मत लिखी जायेगी
Sunday, August 9, 2009
आजा मेरे मौला
दौड़ा दौड़ा मुझे तू थक गया होगा
आजा तेरे पाऊँ दबा दूँ मौला
उस रूखी मस्जिद की महफिल से जुदा
तुझे मीठी सी लोरी सुना दूँ मौला
हवाओं के पंखे घुमा घुमा के
तूफानों की पतवार चला चला के
तेरी रीड की हड्डी भी दुखती तो होगी
तेरी पीठ पे तेल आज लगा दूँ मौला
रोज रोज सुन अजान और अनजान
तेरे कान भी अब तब तरसते तो होंगे
मेरी गली आजा, कुछ रूखा सूखा खा जा
कुछ तेरा भी मन आज बहला दूँ मौला
सब कुछ घुमा के, सब को चमका के
तेरी एडियाँ भी अब फट फटा सी गई है
पहाडों समंदर से सूरज लुड़काते
तेरी आँखें भी अब कुम्भला सी गई हैं
जरा पास आजा, पाँव मुझसे धुलवा जा
तेरी उंगलियाँ अंगूठे चटका दूँ मौला
दौड़ा दौड़ा के मुझे तू थक गया होगा
आजा तेरे पाऊँ दबा दूँ मौला
आजा तेरे पाऊँ दबा दूँ मौला
उस रूखी मस्जिद की महफिल से जुदा
तुझे मीठी सी लोरी सुना दूँ मौला
हवाओं के पंखे घुमा घुमा के
तूफानों की पतवार चला चला के
तेरी रीड की हड्डी भी दुखती तो होगी
तेरी पीठ पे तेल आज लगा दूँ मौला
रोज रोज सुन अजान और अनजान
तेरे कान भी अब तब तरसते तो होंगे
मेरी गली आजा, कुछ रूखा सूखा खा जा
कुछ तेरा भी मन आज बहला दूँ मौला
सब कुछ घुमा के, सब को चमका के
तेरी एडियाँ भी अब फट फटा सी गई है
पहाडों समंदर से सूरज लुड़काते
तेरी आँखें भी अब कुम्भला सी गई हैं
जरा पास आजा, पाँव मुझसे धुलवा जा
तेरी उंगलियाँ अंगूठे चटका दूँ मौला
दौड़ा दौड़ा के मुझे तू थक गया होगा
आजा तेरे पाऊँ दबा दूँ मौला
इन्कलाब
इन्कलाब ऐसे नहीं आयेगा
थोडा खून दो, थोडा पसीना
कुछ विचार दो, कुछ आकार दो
सूरज से धक्कामुक्की करो
और ज्वालामुखी जमा दो
कुछ रास्ते छोटे करो
कुछ पंख बड़े करो
परिवर्तन में परिवर्तन करो
क्यूंकि इंक़लाब ऐसे नहीं आयेगा
थोडा खून दो, थोडा पसीना
कुछ विचार दो, कुछ आकार दो
सूरज से धक्कामुक्की करो
और ज्वालामुखी जमा दो
कुछ रास्ते छोटे करो
कुछ पंख बड़े करो
परिवर्तन में परिवर्तन करो
क्यूंकि इंक़लाब ऐसे नहीं आयेगा
Monday, July 13, 2009
माइकल जैक्सन की मौत
सुबह शाम टीवी पर किसी के मर जाने की खबर आ रही थी
लालता प्रसाद की जोरू रो रो कर हाहाकार मचा रही थी
" अरे माइकल जैक्सनवा मर गवा, हमार जैक्सनवा मर गवा"
का घोष लगा विलाप के सुर में गा रही थी
लालता प्रसाद के होश गुल थे, उसके पास २० रुपये कुल थे
"ई ससुर माई का लाल जैकिसनवा कौन बा, लागत है मेहरारू का भाई बा"
बस आव देखा न ताव, लालता प्रसाद ने दौड़ लगाई
बनिए की दूकान के आगे अपनी सरपट को लगाम लगाई
" बाबूजी हमार साला मर गवा, हमऊ का थोडा उधार चाही"
"टीवी माँ खबर फैली बा, माई का लाल जय किसन अब जिन्दा नाही"
ये सुन बनिए का सर चकराया, उसके समझ में एक विचार आया
झट फ़ोन कर उसने टीवी चैनल के संवाददाता को बुलवाया
भारी भरकम कैमरे लिए टीवी चैनल का हुजूम दौड़ा चला आया
लालता प्रसाद के साक्षात्कार लेने वालों की लाइन लग गई
"माइकल जैक्सन का भारतीय जीजा" की हेडलाइन अखबारों में छप गई
लालता प्रसाद की जोरू के तेवर देखने लायक थे
उसके आगे तो आज सारे नालायक थे
वो कोठी की मेमसाब की फटी साडी पहन चुलबुला रही थी
हर सवाल के जवाब में " जस्ट बीट ईट " गा रही थी
पूरे देश में लालता प्रसाद रातों रात मशहूर हो गया
उसका आल इंडिया टूर किसी चैनल और प्रायोजक से अप्रूव हो गया
वाह री चैनल पच्चीसी की माया,
एक का नहीं तूने तो करोडो का बेवकूफ बनाया
ऐसे ही ये सब बेवकूफ बनते रहेंगे,
अभी कई मौतें हैं और आयेंगी ऐसी
जिसमे कई लालता प्रसाद बनते बिगड़ते रहेंगे
लालता प्रसाद की जोरू रो रो कर हाहाकार मचा रही थी
" अरे माइकल जैक्सनवा मर गवा, हमार जैक्सनवा मर गवा"
का घोष लगा विलाप के सुर में गा रही थी
लालता प्रसाद के होश गुल थे, उसके पास २० रुपये कुल थे
"ई ससुर माई का लाल जैकिसनवा कौन बा, लागत है मेहरारू का भाई बा"
बस आव देखा न ताव, लालता प्रसाद ने दौड़ लगाई
बनिए की दूकान के आगे अपनी सरपट को लगाम लगाई
" बाबूजी हमार साला मर गवा, हमऊ का थोडा उधार चाही"
"टीवी माँ खबर फैली बा, माई का लाल जय किसन अब जिन्दा नाही"
ये सुन बनिए का सर चकराया, उसके समझ में एक विचार आया
झट फ़ोन कर उसने टीवी चैनल के संवाददाता को बुलवाया
भारी भरकम कैमरे लिए टीवी चैनल का हुजूम दौड़ा चला आया
लालता प्रसाद के साक्षात्कार लेने वालों की लाइन लग गई
"माइकल जैक्सन का भारतीय जीजा" की हेडलाइन अखबारों में छप गई
लालता प्रसाद की जोरू के तेवर देखने लायक थे
उसके आगे तो आज सारे नालायक थे
वो कोठी की मेमसाब की फटी साडी पहन चुलबुला रही थी
हर सवाल के जवाब में " जस्ट बीट ईट " गा रही थी
पूरे देश में लालता प्रसाद रातों रात मशहूर हो गया
उसका आल इंडिया टूर किसी चैनल और प्रायोजक से अप्रूव हो गया
वाह री चैनल पच्चीसी की माया,
एक का नहीं तूने तो करोडो का बेवकूफ बनाया
ऐसे ही ये सब बेवकूफ बनते रहेंगे,
अभी कई मौतें हैं और आयेंगी ऐसी
जिसमे कई लालता प्रसाद बनते बिगड़ते रहेंगे
Friday, July 3, 2009
बन्दर की छलांग
चाँद सूरज पर जाने को इंसान छलांग लगा रहा है
देखो कैसे उसका अन्तरिक्ष यान मंगल गृह जा रहा है
अपनी घर में तो सेंध लगा ही ली,
अब और कुछ सत्यानाश करने का विचार बना रहा है
खुद को तो जीत न पाया कभी
अब आकाशगंगा को हराने की जुगत लड़ा रहा है
धरती पर ठीक से न चल पाने वाला
देखो कैसे कुदरत को दोड़ना सिखा रहा है
अपनी ही तकनीक के औजारों से
देखो मूर्ख कैसे अपनी ही कबर बना रहा है
देखो कैसे बन्दर इतरा कर छलांग लगा रहा है
देखो कैसे उसका अन्तरिक्ष यान मंगल गृह जा रहा है
अपनी घर में तो सेंध लगा ही ली,
अब और कुछ सत्यानाश करने का विचार बना रहा है
खुद को तो जीत न पाया कभी
अब आकाशगंगा को हराने की जुगत लड़ा रहा है
धरती पर ठीक से न चल पाने वाला
देखो कैसे कुदरत को दोड़ना सिखा रहा है
अपनी ही तकनीक के औजारों से
देखो मूर्ख कैसे अपनी ही कबर बना रहा है
देखो कैसे बन्दर इतरा कर छलांग लगा रहा है
Thursday, July 2, 2009
दिल और दिमाग
कभी खुद से बातें कर के देखा है ?
दिल और दिमाग के द्वंद युद्घ का कभी कोई परिणाम देखा है
दिमाग से चलो तो कश्मीर फिलिस्तीन तिब्बत सा हाल पाओगे
दिल से सोचो तो जर्मनी की दीवार गिरा एक हो जाओगे
कितने ही सम्मेलन या शिखर वार्ताएं कर लो
आदमी के दुःख दर्द को समझो तभी देश चला पाओगे
संत सी सोच चलो तो कुछ कांटे तो चुभेंगे ही
चोर सी सोच में तो कांटे ही राह बन जायेंगे
महुवे से सब्जी तरकारी बना लो या फिर शराब
दिल से सोच लो या दिमाग से, दोनों की ही है अलग बात
एक गणित सी जटिल सोच बनाता है और दूसरा जटिल को सरल
दिल और दिमाग की लडाई में दोनों ही है अविरल
दिल और दिमाग के द्वंद युद्घ का कभी कोई परिणाम देखा है
दिमाग से चलो तो कश्मीर फिलिस्तीन तिब्बत सा हाल पाओगे
दिल से सोचो तो जर्मनी की दीवार गिरा एक हो जाओगे
कितने ही सम्मेलन या शिखर वार्ताएं कर लो
आदमी के दुःख दर्द को समझो तभी देश चला पाओगे
संत सी सोच चलो तो कुछ कांटे तो चुभेंगे ही
चोर सी सोच में तो कांटे ही राह बन जायेंगे
महुवे से सब्जी तरकारी बना लो या फिर शराब
दिल से सोच लो या दिमाग से, दोनों की ही है अलग बात
एक गणित सी जटिल सोच बनाता है और दूसरा जटिल को सरल
दिल और दिमाग की लडाई में दोनों ही है अविरल
लालता प्रसाद का घर
जोरू टीवी देख बुद्धिमान हो रही थी
लालता प्रसाद की नींदें हराम हो रही थी
अढाई हज़ार रुपईया महिना की पगार, और ऊपर से जाफरानी ठर्रे का खर्चा
हर महीने बनिए का मिल जाता एक और उधार का पर्चा
कलुआ और देवकलिया भी स्कूल जाने लगे थे
उनके मास्टर भी न जाने क्या क्या पाठ पढाने लगे थे
लुगाई का क्या है, वो तो कोठी में झाडू पोचा कर आती है,
मेमसाब की फटी साड़ी को पहन, प्रियंका चोपडा बन जाती है
न जाने क्या क्या उनके टीवी पर देख के आती है
रात को अजीबोगरीब उलूल जलूल हरकतें कर रात भर जगाती है
कब सुबह होती है और कब रात, लालता प्रसाद का हर दिन हर नयी रात
पास की कोठी के सभरवाल जी की हालत खस्ताहाल है
दिल ने साथ छोड़ डाला, जोरू का भी बुरा हाल है
ठर्रा नहीं वो अंग्रेजी का नशा करते हैं
माँ बहिन की तो नहीं पर अंग्रेजी में गाली जरूर बकते हैं
कलुआ और देवकलिया की तरह उनके बच्चे भी स्कूल जाते हैं
पडोसी बताते हैं वो स्कूल में तो नहीं पर सिनेमा हाल में पाए जातें हैं
बनिया तो परेशान नहीं करता पर रिकवरी एजेंट कभी कभार घर आते हैं
एक आध थप्पड़ और कभी कभार एक आध घूँसा रसीद कर जाते हैं
लालता प्रसाद के घर न नलका, न बिजली, न पानी है
फिर भी कलुआ और देवकलिया के लिए वो सपनो की धानी है
लालता प्रसाद की नींदें हराम हो रही थी
अढाई हज़ार रुपईया महिना की पगार, और ऊपर से जाफरानी ठर्रे का खर्चा
हर महीने बनिए का मिल जाता एक और उधार का पर्चा
कलुआ और देवकलिया भी स्कूल जाने लगे थे
उनके मास्टर भी न जाने क्या क्या पाठ पढाने लगे थे
लुगाई का क्या है, वो तो कोठी में झाडू पोचा कर आती है,
मेमसाब की फटी साड़ी को पहन, प्रियंका चोपडा बन जाती है
न जाने क्या क्या उनके टीवी पर देख के आती है
रात को अजीबोगरीब उलूल जलूल हरकतें कर रात भर जगाती है
कब सुबह होती है और कब रात, लालता प्रसाद का हर दिन हर नयी रात
पास की कोठी के सभरवाल जी की हालत खस्ताहाल है
दिल ने साथ छोड़ डाला, जोरू का भी बुरा हाल है
ठर्रा नहीं वो अंग्रेजी का नशा करते हैं
माँ बहिन की तो नहीं पर अंग्रेजी में गाली जरूर बकते हैं
कलुआ और देवकलिया की तरह उनके बच्चे भी स्कूल जाते हैं
पडोसी बताते हैं वो स्कूल में तो नहीं पर सिनेमा हाल में पाए जातें हैं
बनिया तो परेशान नहीं करता पर रिकवरी एजेंट कभी कभार घर आते हैं
एक आध थप्पड़ और कभी कभार एक आध घूँसा रसीद कर जाते हैं
लालता प्रसाद के घर न नलका, न बिजली, न पानी है
फिर भी कलुआ और देवकलिया के लिए वो सपनो की धानी है
सपने ने मुझे देखा
एक रात एक सपने ने मुझे देखा
बोला... तुम तो बहुत गुणवान हो,
ये क्यूँ नहीं करते, वो क्यूँ नहीं करते
ऐसा क्यूँ नहीं करते, वैसा क्यूँ नहीं करते
ये करोगे तो ये हो जायेगा, वो करोगे तो वो हो जायेगा
सारा जटिल गणित देखो कितना सरल हो जायेगा
मैं कुछ न बोला, बस टकटकी लगाये देखता रहा
सुबह ने बहुत सरलता से लील डाला उस सपने को
और फिर मैने उस सपने को देखा
श्रींगार रहित, अपने असली रूप में
सपना मुझे देख रो पड़ा
आज मैने उस सपने का फिर से श्रृंगार किया
मेरा सपना वो नहीं जो मुझे बतलायेगा
मेरा सपना वो है जो सच हो सुबह को लील जायेगा
सपना मेरा वो नहीं जो रात को सुनहरा बनाएगा
सपना मेरा वो है जो दिन को प्रकाश दिखलायेगा
बोला... तुम तो बहुत गुणवान हो,
ये क्यूँ नहीं करते, वो क्यूँ नहीं करते
ऐसा क्यूँ नहीं करते, वैसा क्यूँ नहीं करते
ये करोगे तो ये हो जायेगा, वो करोगे तो वो हो जायेगा
सारा जटिल गणित देखो कितना सरल हो जायेगा
मैं कुछ न बोला, बस टकटकी लगाये देखता रहा
सुबह ने बहुत सरलता से लील डाला उस सपने को
और फिर मैने उस सपने को देखा
श्रींगार रहित, अपने असली रूप में
सपना मुझे देख रो पड़ा
आज मैने उस सपने का फिर से श्रृंगार किया
मेरा सपना वो नहीं जो मुझे बतलायेगा
मेरा सपना वो है जो सच हो सुबह को लील जायेगा
सपना मेरा वो नहीं जो रात को सुनहरा बनाएगा
सपना मेरा वो है जो दिन को प्रकाश दिखलायेगा
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